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यूपी रेरा में बिल्डर के ख़िलाफ़ शिकायत कैसे करें: पूरी प्रक्रिया

up-rera.in पर ऑनलाइन RERA शिकायत कैसे करें — फ़ोरम का चुनाव, ₹1,000 फ़ीस, दस्तावेज़, सुनवाई, रिफ़ंड और देरी का ब्याज, अपील और वसूली।

By the legal team at Neeraj Associates · Updated 21 October 2026 · 8 min read

टीम नीरज एसोसिएट्स, लखनऊ · अंतिम समीक्षा: अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें

Read in English: How to file a RERA complaint in Uttar Pradesh

संक्षिप्त उत्तर: उत्तर प्रदेश में घर खरीदार रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के तहत up-rera.in पर ऑनलाइन RERA शिकायत दर्ज करता है। इसके लिए शिकायतकर्ता प्रोफ़ाइल बनाएँ और फ़ोरम चुनें: प्राधिकरण, मुआवज़े के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer), या सुलह मंच (Conciliation Forum)। फिर प्रोजेक्ट और बिल्डर का विवरण भरें, दस्तावेज़ PDF में अपलोड करें और ₹1,000 फ़ीस ऑनलाइन जमा करें। शिकायत नंबर संभालकर रखें। नोटिस और सुनवाई की तारीख़ ईमेल और SMS से आती है। अधिनियम कहता है कि प्राधिकरण यथासंभव 60 दिन में शिकायत का निपटारा करे।

UP RERA में कब शिकायत करें?

RERA घर खरीदारों ("आवंटी" या allottee) और बिल्डरों ("प्रमोटर") के बीच के विवादों के लिए बना है। शिकायत के आम आधार हैं:

  • कब्ज़े (possession) में देरी: एग्रीमेंट फ़ॉर सेल में लिखी तारीख़ के बाद भी कब्ज़ा न मिलना (धारा 18)
  • वादे के मुताबिक़ निर्माण न होना: या खरीदारों की सहमति के बिना स्वीकृत नक्शे में बदलाव (धारा 14)
  • ढाँचे या कारीगरी की ख़राबी: कब्ज़े के पाँच साल के भीतर बताई जाए तो बिल्डर को 30 दिन में बिना ख़र्च ठीक करनी होती है (धारा 14(3))
  • रजिस्ट्री न करना: कन्वेयंस डीड न करना या कॉमन एरिया एसोसिएशन को न सौंपना (धारा 11 और 17)
  • ज़्यादा एडवांस लेना: रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिना कीमत का 10% से ज़्यादा एडवांस लेना (धारा 13)
  • झूठा विज्ञापन: या भ्रामक ब्रोशर (धारा 12)
  • बिना रजिस्ट्रेशन बिक्री: ऐसे प्रोजेक्ट में बिक्री जिसका RERA रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था (धारा 3)

आम तौर पर जिस प्रोजेक्ट की ज़मीन 500 वर्ग मीटर से ज़्यादा हो या जिसमें आठ से ज़्यादा फ़्लैट हों, उसका रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। शिकायत से पहले UP RERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, स्वीकृतियाँ और तिमाही प्रगति रिपोर्ट देख लें।

प्राधिकरण, न्यायनिर्णायक अधिकारी या सुलह: कौन-सा फ़ोरम?

  • प्राधिकरण (धारा 31): अधिनियम, नियमों या विनियमों के उल्लंघन के लिए, जिसमें धारा 18 के तहत ब्याज सहित रिफ़ंड या देरी का ब्याज भी शामिल है।
  • न्यायनिर्णायक अधिकारी (धारा 71 और 72): मुआवज़े के लिए। अधिकारी देखता है कि बिल्डर को कितना अनुचित लाभ हुआ, आपको कितना नुकसान हुआ और क्या गलती बार-बार की गई।
  • सुलह मंच: UP RERA पहले आपसी समझौते का रास्ता देता है। धारा 32(g) प्राधिकरण से अपेक्षा करती है कि वह बिल्डर और खरीदार के बीच सुलह को बढ़ावा दे। आप सुलह न चाहें तो नियमित शिकायत में आगे बढ़ते हैं।

UP RERA नियम, 2016 के तहत प्राधिकरण के पास शिकायत फ़ॉर्म M (नियम 33) में और न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास मुआवज़े की शिकायत फ़ॉर्म N (नियम 34) में होती है। दोनों की फ़ीस ₹1,000 है, और पोर्टल पर ये ऑनलाइन भरे जाते हैं। फ़ोरम शिकायत दर्ज करते समय चुना जाता है। कई खरीदार रिफ़ंड या देरी के ब्याज के लिए प्राधिकरण में और मुआवज़े के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास अलग से दावा करते हैं।

up-rera.in पर शिकायत दर्ज करने का तरीका (क्रमवार)

  1. पहले बिल्डर को लिखित नोटिस भेजें। यह ज़रूरी नहीं है, लेकिन तारीख़ वाला नोटिस और बिल्डर का जवाब (या चुप्पी) आपकी शिकायत को मज़बूत करते हैं।
  2. प्रोजेक्ट की जानकारी जुटाएँ। प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, बिल्डर कंपनी का रजिस्टर्ड नाम-पता, अपना यूनिट नंबर और कब्ज़े की तय तारीख़ नोट करें।
  3. शिकायतकर्ता प्रोफ़ाइल बनाएँ। यह up-rera.in के complaints सेक्शन में अपने ईमेल और मोबाइल नंबर से बनती है। अगर वकील या अधिकृत व्यक्ति आपकी ओर से शिकायत करे, तो उसका ईमेल और मोबाइल नंबर भी देना होता है।
  4. फ़ोरम और शिकायत का प्रकार चुनें: प्राधिकरण, न्यायनिर्णायक अधिकारी (मुआवज़ा) या सुलह मंच। पोर्टल पूछता है कि क्या इसी मामले में RERA, उपभोक्ता आयोग या किसी अन्य फ़ोरम में कोई केस चल रहा है या तय हो चुका है। इसका सही जवाब दें।
  5. शिकायत भरें। तथ्य तारीख़वार लिखें। साथ में चुकाई गई रकम, माँगी गई राहत (ब्याज सहित रिफ़ंड, देरी का ब्याज, कब्ज़ा, मरम्मत, कन्वेयंस डीड, मुआवज़ा) और जिन धाराओं का उल्लंघन हुआ, वे भी लिखें।
  6. दस्तावेज़ साफ़ PDF में अपलोड करें। कोई और आपकी ओर से शिकायत कर रहा हो तो वकालतनामा या अधिकार-पत्र भी अपलोड करें।
  7. प्रीव्यू देखें, ₹1,000 फ़ीस ऑनलाइन जमा करें और सबमिट करें। भुगतान के बाद मिलने वाला शिकायत नंबर सँभालकर रखें।
  8. माँगी जाए तो हार्ड कॉपी जमा करें। UP RERA की शिकायत प्रक्रिया के अनुसार डाउनलोड की गई शिकायत और संलग्नकों की स्व-प्रमाणित हार्ड कॉपी लखनऊ या NCR (ग्रेटर नोएडा) कार्यालय में जमा करनी पड़ सकती है। ताज़ा निर्देश पोर्टल पर देख लें।

ज़रूरी दस्तावेज़

  • आवंटन पत्र (allotment letter) और एग्रीमेंट फ़ॉर सेल (बिल्डर-बायर एग्रीमेंट)
  • सभी भुगतान रसीदें और भुगतान दिखाने वाले बैंक स्टेटमेंट
  • बिल्डर के डिमांड लेटर
  • बिल्डर से हुआ पत्राचार, जिसमें आपका नोटिस और उसका जवाब भी हो
  • होम लोन का स्वीकृति पत्र और त्रिपक्षीय समझौता (अगर हो)
  • कब्ज़ा पत्र, फ़ोटो और इंजीनियर की रिपोर्ट (ख़राबी के दावे के लिए)
  • आपका पहचान पत्र

शिकायत के बाद क्या होता है?

  • नोटिस और जवाब: बिल्डर को नोटिस जाता है और वह जवाब दाख़िल करता है। आप उस पर प्रत्युत्तर (rejoinder) दे सकते हैं।
  • सुनवाई: तारीख़, बेंच और स्थान की जानकारी आपके रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल पर आती है। इसे शिकायत नंबर से पोर्टल पर भी देखा जा सकता है। UP RERA के कार्यालय लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में हैं।
  • समय-सीमा: धारा 29(4) के अनुसार प्राधिकरण यथासंभव 60 दिन में शिकायत का निपटारा करे, और धारा 71(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी के लिए भी यही लक्ष्य रखती है। ऐसा न हो पाए तो कारण दर्ज करने होते हैं। व्यवहार में कई शिकायतों में ज़्यादा समय लगता है।
  • अंतरिम आदेश: धारा 36 के तहत ज़रूरी होने पर प्राधिकरण जाँच के दौरान बिल्डर को किसी काम से रोक सकता है।

कौन-सी राहत मिल सकती है?

  • ब्याज सहित रिफ़ंड: अगर आप देरी वाले प्रोजेक्ट से हटना चाहें (धारा 18(1) और 19(4))
  • देरी के हर महीने का ब्याज: कब्ज़ा मिलने तक, अगर आप प्रोजेक्ट में बने रहें (धारा 18(1))
  • मुआवज़ा: नुकसान के लिए, जिसे न्यायनिर्णायक अधिकारी तय करता है (धारा 18 और 71)
  • निर्देश: काम पूरा करने, ख़राबी ठीक करने, कन्वेयंस डीड करने या प्रोजेक्ट रजिस्टर कराने के
  • जुर्माना: उल्लंघन करने और RERA के आदेश न मानने पर बिल्डर पर (धारा 59 से 63)

ब्याज उत्तर प्रदेश के नियमों में तय दर से मिलता है। यह दर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के MCLR में 1% जोड़कर बनती है।

अपील और वसूली, संक्षेप में

  • अपील: कोई भी पक्ष आदेश मिलने के 60 दिन के भीतर उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है (धारा 44(2))। बिल्डर को अपील से पहले कम से कम 30% जुर्माना, या खरीदार को देय पूरी रकम ब्याज और मुआवज़े सहित, जमा करनी होती है (धारा 43(5))। इसके बाद धारा 100 CPC में बताए गए आधारों पर 60 दिन के भीतर हाई कोर्ट में अपील हो सकती है (धारा 58)।
  • वसूली: बिल्डर भुगतान न करे तो धारा 40(1) के तहत रकम भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूली जाती है। इसके लिए ज़िलाधिकारी को वसूली प्रमाणपत्र (recovery certificate) भेजा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूपी में RERA शिकायत की फ़ीस कितनी है?

₹1,000, जो up-rera.in पर शिकायत दर्ज करते समय ऑनलाइन जमा होती है।

क्या वकील के बिना RERA शिकायत कर सकते हैं?

हाँ। खरीदार ख़ुद शिकायत दर्ज करके बहस कर सकता है। बड़े दावों में ड्राफ़्टिंग, ब्याज की गणना और सुनवाई के लिए कई खरीदार वकील की मदद लेते हैं।

क्या RERA शिकायत की कोई समय-सीमा है?

अधिनियम में शिकायत के लिए कोई ख़ास समय-सीमा तय नहीं है। फिर भी देरी के तुरंत बाद शिकायत करना बेहतर है, क्योंकि तब दस्तावेज़ और सबूत जुटाना आसान रहता है, और बिल्डर देरी का मुद्दा उठा सकता है।

क्या RERA की जगह उपभोक्ता आयोग जा सकते हैं?

RERA अधिनियम दूसरे कानूनों के अतिरिक्त है (धारा 88), इसलिए उपभोक्ता शिकायत भी संभव हो सकती है। लेकिन एक ही दावा एक साथ दो फ़ोरम में नहीं चलाया जा सकता, और पोर्टल ऐसे किसी केस की जानकारी माँगता है।

मेरा प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड नहीं है। क्या फिर भी शिकायत कर सकता हूँ?

हाँ। UP RERA पोर्टल पर बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट की शिकायत का अलग विकल्प है। ज़रूरी रजिस्ट्रेशन के बिना बिक्री करने वाले बिल्डर पर धारा 59 के तहत जुर्माना लगता है।

UP RERA शिकायत का स्टेटस कैसे देखें?

up-rera.in के complaints सेक्शन में लॉग इन करके शिकायत नंबर से देखें। सुनवाई की तारीख़ ईमेल और SMS से भी आती है।

लेखक: टीम नीरज एसोसिएट्स, लखनऊ

ईमेल: rishi.saxena@neerajassociates-legal.com · फ़ोन: +91 8960006363

इस गाइड पर कोई सवाल? यहाँ बताए गए कानून के बारे में आपका कोई सवाल हो, तो rishi.saxena@neerajassociates-legal.com पर लिखें। चुने हुए सवालों के जवाब इस गाइड के आगे के अपडेट में दिए जाएँगे। इस वेबसाइट के माध्यम से हम किसी व्यक्तिगत मामले पर सलाह नहीं देते।

अस्वीकरण: यह लेख अक्टूबर 2026 तक की सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। RERA के नियम, फ़ीस और पोर्टल की प्रक्रिया बदलती रहती हैं, और हर मामला उसके तथ्यों पर निर्भर करता है। अपनी स्थिति के बारे में किसी अधिवक्ता से सलाह लें।

Disclaimer: This article is general information about Indian law and is not legal advice. Laws, rules and court rulings change, and your situation may differ. Please consult an advocate before acting.

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